Skip to content

Bounce Rate Kya Hai: 21 तरीकों से बाउंस रेट कम करे

बाउंस रेट क्या होता है तथा इसको कम कैसे करेंगे इसके बारे में इस पोस्ट के माध्यम से विस्तार में जानेंगे। किसी भी ब्लॉग पोस्ट कंटेंट का Bounce Rate अगर 50% से ऊपर है तो फिर चिंताजनक बात होती है।

वेबसाइट का बाउंस रेट 50% से ऊपर होने का मतलब है कि आपका कंटेंट लोगों को पसंद नहीं आ रहा है इस वजह से आपका बाउंसर बढ़ रहा है।

सर्च इंजन के नियमो के अनुसार जब किसी वेबसाइट का बाउंस रेट एवरेज से भी ज्यादा होता है तो गूगल सर्च रिजल्ट में उस वेबसाइट की अथॉरिटी कम होने लगती है जिसकी वजह से आपका कंटेंट रैंक कराने में दिक्क्त आता है।

बाउंस रेट ज्यादा होने का कई कारन होता है लेकिन इसका मुख्य कारन यह होता ही कि आपके वेबसाइट पर आने वाले यूजर्स को आपका कट कंटेंट पसंद नहीं आ रहा है जो आपके लिए पुनः विचार करने की जरूरत है।

लेकिन आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है हम इस आर्टिकल में पूरी डिटेल से जानेंगे कई तरह के टिप्स और ट्रिक्स की बात करेंगे जिसके माध्यम से हम किसी भी वेबसाइट का बाउंस रेट कम कर सकते हैं।

 

Index hide
3 Bounce Rate को कम कैसे करें?

Bounce Rate क्या होता है(What is Bounce Rate in Hindi)

जब कोई विजिटर सर्च आपके वेब पेज पर आता है और बिना कोई दूसरा लिंक खोले ही वापस चला जाता है तो वह उस पेज के लिए Bounce Rate कहलाता है।

आपकी वेबसाइट में Single-Page Session

Analytics tools में जब किसी Single Page Session Triggered होता है तो वह बाउंस रेट में गिना जाता है। जैसे कि कोई यूजर किसी वेबसाइट का पेज ओपन कर रहा है और उसके बाद वहां से एग्जिट कर दे रहा है और वेबसाइट से चला जा रहा है तो एनालिटिक्स सर्वर उस Session Duration को बाउंस रेट में कंसीडर करता है।

अगर आप कोई ब्लॉग लिख रहे हैं तो आपकी पूरी कोशिश होती है कि उसकी सर्च परफॉर्मेंस बेहतर हो जिसमे पहला टास्क आता है बाउंस रेट को कम से कम हो।

 

Bounce Rate के कारण क्या है?

हाई बाउंस रेट पुअर वेबसाइट का प्रतीक है।

जब विजिटर वेबसाइट पेज पर आता है और उसके बाद वह चला जा रहा है इसका मतलब यह है कि या तो वह वेबसाइट उस विजिटर्स के लिए कंटेंट सही कंटेंट डिलीवर नहीं कर पा रहा है या विजिटर्स के एक्सपेक्टेशन को फुलफिल नहीं कर रहा है।

हालांकि कई बार इसका मतलब यह भी होता है कि जिस पेज पर जिस यूजर जिस इंटेंशन के साथ आया वह पूरा हो गया और वह वेबसाइट से एग्जिट कर दिया।

Too Much self-sufficient कंटेंट भी वेबसाइट का बाउंस रेट का कारण बनता है।

 

16 Common Causes of High Bounce Rates in Hindi

  1. बहुत ज्यादा वेबसाइट का स्लो होना।
  2. कंटेंट में Misleading Descriptions/Title/Tag ऐड करना।
  3. वेबसाइट पर Low-Quality Content का होना।
  4. Error 404 का दिखना।
  5. दूसरे वेबसाइट से Bad Link का आना।
  6. Mobile Friendly न होना।
  7. Unser Interface का बढ़िया न होना।
  8. वेबसाइट पर Too Many Popup Show होना।
  9. Bad Form
  10. पर्याप्त और क्वालिटी इंटरनल लिंक का न होना।
  11. Related Posts नहीं दिखना।
  12. कंटेंट का Too Much Self-Sufficient होना।
  13. Blank Page or Technical Error या खामियों का होना।
  14. विजिटर को विजिट करते ही फॉर्म फील करने के लिए पूछना।
  15. कंटेंट का स्पष्ट न होना।
  16. गलत या irrelevant कम्युनिटी में लिंक को शेयर करना।

 

Bounce Rate को कम कैसे करें?

जब हम बाउंस रेट बढ़ने का करण जान चुके है तो वेबसाइट की बाउंस रेट को कम करने के लिए लिए हमें उन समस्या को Solve करना होगा।

अगर आप नीचे बताए गए समस्याओं को solve कर लेते है तो आपके वेबसाइट का बाउंस रेट बेहतर हो जायेगा।

 

1. यूजर फ्रेंडली वेबसाइट डिजाइन(User Friendly Website Design)

वेबसाइट डिजाइन का यूजर फ्रेंडली होना काफी आवश्यक है जब चीजें देखने में अच्छी लगती है और आंखों पर जोर नहीं पड़ता है तो विजिटर्स उस कंटेंट को पूरा पढ़ते हैं।

डिज़ाइन यूजर फ्रेंडली होने के करण Visitors को किसी Distraction का सामना नहीं करना पड़ता है।

जब आप अपने ब्लॉग को या वेबसाइट को डिजाइन कर रहे हैं तो उस वक्त Color Combination, Text Size, Font Family आदि का ध्यान रखना जरूरी होता है।

  • बहुत ज्यादा आंखों को चुभने वाले Color Use ठीक नहीं होता है।
  • बिलकुल ही Normal Design भी ठीक नहीं होता है।
  • Text size और Font Family ब्लॉग टाइप के अनुसार होना चाहिए।
  • ज्यादा Animations का उपयोग ठीक नहीं होता

 

2. Page Load Time बेहतर करे

जब कोई वेबसाइट बहुत स्लो लोड(Excessive Amount of Time) होता है तो कोई भी विजिटर वेबसाइट पर रुकना नहीं चाहता है।

अपने वेबसाइट का page load time चेक करने के लिए बहुत सारे फ्री टूल है जिसकी मदद से अपने वेबसाइट का लोडिंग समय चेक कर सकते है।

Website ka Bounce Rate Kaise Kam kare

Gtmatrix Report

पेज लोड टाइम कितना होना चाहिए?

  • 1 से 2 seconds: Perfect
  • 2 से 3 seconds: Above average
  • 3 से 5 seconds: Average
  • 5 से 7 Second: Poor
  • 7 सेकंड से ऊपर: Very Poor

पेज लोड टाइम कैसे चेक करे(How to Check Page Load Time)?

  1. Gtmatrix.com
  2. Google Page Speed Insight
  3. Pingdom.com
  4. Semrush.com/siteaudit

अगर आपका वेबसाइट 3 सेकंड के अंदर लोड हो रहा है तो फिर चिंता की कोई बात नहीं।

लेकिन अगर इस से ज्यादा समय लग रहा है तो आपको अपने वेबसाइट पर improvement points पर काम करने की जरूरत है।

इस समस्या को जल्दी से छुटकारा पाने का आसान तरीका यह है की Cloudflare or SUCURI सर्विस का High-Performance CDN खरीदना।

 

3. Review SEO Title, Meta Description, Tag

कई बार पेज का Title, Meta Description या Tag गलत लगाने से भी पेज पर गलत ट्रैफिक आता है जो बाउंस रेट बढ़ने का कारण बनता है ऐसे में आपको कंटेंट पोस्ट का Title, Meta Description या Tag आदि को रिव्यू करने की जरूरत होती है।

आपको अपने विजिटर्स की एक्सपेक्टेशन को अलाइन करना होता है।

जो कंटेंट आप पेज में डिलीवर कर रहे हैं उस कंटेंट से मिलता जुलता यूआरएल होना जरूरी है।

जिसकी कीवर्ड पर आप टारगेट कर रहे होते हैं उस कीवर्ड का पेज कंटेंट रिलेवेंट होना काफी जरूरी है।

ऐसे में आपको कीवर्ड रिसर्च करके ही कंटेंट लिखना चाहिए। अगर कोई विजिटर आपके द्वारा टारगेट किए गए कीवर्ड से कन्वेंस होकर आपके पेज पर आ रहा है और उसको उस कीवर्ड से रिलेटेड रेलेवेंट कंटेंट नहीं मिलता है तो विजिटर तुरंत पेज बंद है जो बाउंस रेट में चला जाता है।

 

इसे भी पढ़े: How to Do Keyword Research & Free Tools in Hindi

 

4. Bounce Rate Improve करने के लिए SEO उपयोग करे

अपने ब्लॉग पोस्ट कंटेंट में प्रॉपर SEO का उपयोग करना बाउंस रेट को कम करता है। बाउंस रेट वेबसाइट हेल्थ स्कोर को भी प्रभावित करता है।

आपको अपने वेबसाइट कंटेंट में प्रॉपर सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन उपयोग करना होगा इसके लिए आपको निम्न चीजों का ध्यान रखना होगा:

  • Effective Competitive Research
  • Keyword Research
  • Link Building
  • Rank Tracking
  • on-page SEO
  • Technical SEO

 

5. वेबसाइट सर्च ऑप्शन को आसान बनाये।

कुछ Site Searc Optionh को नेगलेस्ट करते हैं और वह अपने वेबसाइट पर सर्च ऑप्शन नहीं रखते हैं या उनका सर्च ऑप्शन यूज़ करने में डिफिकल्ट होता है।

जब विजिटर को कुछ नया कंटेंट सर्च करता है तो तो उसे रिजल्ट पेज जल्दी नहीं दीखता है जो बाउंस रेट का करण बनता है।

 

6. वेबसाइट नेविगेशन आसान और क्लियर रखे(Keep Website Navigation Easy and Clear)

नेविगेशन इस तरह से होना चाहिए की जब कोई यूजर वेबसाइट पर विजिट करे तो उसे स्पस्ट दिखना चाहिए की उसे कहा जाना है और जिस कंटेंट के लिए वह पेज पर आया है वह कहा मिलेगा।

 

7. रेस्पॉन्सिव वेबसाइट डिज़ाइन रखे(Keep Responsive Website Design)

मोबाइल यूजर के पास डेस्कटॉप यूजर की तुलना में कम पेशेंस होता है वह वेबसाइट तुरंत छोड़कर चले जाते है अगर वेबसाइट सही से नहीं खुलता है।

थीम का चुनाव करते वक्त या Develop करते वक्त Responsive or Mobile Friendly Theme रखे।

 

8. Webpages को पढ़ने में आसानी होनी चाहिए

अपने वेबपेज को आसानी से पढ़े जाने लायक बनाइये। आपका कंटेंट इस तरह से लिखा होना चाहिए कि वह किसी भी विजिटर्स के लिए Clearly Visible हो।

टेक्स्ट फॉर्मेट आँखों को पसंद आने वाली हो ज्यादा चुभने वाली नहीं होना चाहिए।

ब्लॉग के लिए नार्मल ब्लैक एंड वाइट फॉर्मेट सही रहता है इसक यूजर एक्सपीरियंस भी सही होता है।

जब कोई विजिटर किसी पेज पर आता है तो उसको आंखों को चुभन देने वाली कंटेंट या कंटेंट फॉर्मेट नहीं होना चाहिए।

इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका कंटेंट कितना अच्छा है अगर कंटेंट पढ़ने में अट्रैक्टिव नहीं है और सही फॉर्मेट में नहीं लिखा गया है तो पेज का बाउंस रेट बढ़ेगा।

वेबसाइट की Usability बेहतर होनी चाहिए। कोई भी व्यक्ति अगर उसका अनुभव आपके वेब पेज पर बढ़िया नहीं है तो वो आगे पढ़ना नहीं चाहेगा।

 

9. Quality Content का होना है बहुत जरूरी

यूजर इंटेंट को पूरा करना आपके ब्लॉग का एक अलग ब्रांड बनने में सहयता करता है इसीलिए Quality Content का होना काफी जरूरी है।

जब भी कोई विजिटर किसी भी पेज पर विजिट करता है और ऐसे में उसका इंटेंट पूरा नहीं हो रहा है तो फिर उसको उस पेज पर आने का कुछ फायदा नहीं हुआ ऐसे में वह विजिटर आपके पेज से चला जायेगा।

आपने जिसकी कीवर्ड पर विजिटर को अपने वेबपेज पर लैंड कराया है जिस टाइटल डिस्क्रिप्शंस के साथ अपने कंटेंट पर विजिटर्स को बुलाया है अगर उसका इंटेंट उस वेबपेज में पूरा नहीं हो रहा है तो यह बहुत ही Negative User Experiance है जो किसी भी विजिटर्स के लिए Time Wasting Moment होता है।

क्वालिटी कंटेंट आपके ब्रांड को बेहतर करने के लिए, अपनी वेबसाइट का एक ब्रांड तैयार करने के लिए, अपने विजिटर को वैल्युएबल कंटेंट देना होगा।

Valuable Content देने के लिए आपको जरूरी रिसर्च करने पड़ेंगे। जिस टॉपिक पर आप ब्लॉग लोग लिख रहे हैं उस टॉपिक पर Deppth Analysis करना होगा तब जाकर आप क्वालिटी कंटेंट दे पाएंगे।

आप जो इंफॉर्मेशन अपने यूजर के साथ साझा कर रहे हैं वह Authentic होना चाहिए उसके लिए आपको तरह-तरह के Source of Information से Verify करना होगा नहीं तो यूजर्स को तुरंत पता चल जाता है और वह तुरंत पेज क्लोज कर चले जाते हैं जो Bounce Rate को बढ़ाता है।

 

10. अट्रैक्टिव और शार्ट पैराग्राफ्स लिखे(Write Attractive and Short Paragraphs)

छोटे छोटे पैराग्राफ मे लिखने से यूजर उस कंटेंट को पूरा पढ़ता है और वह कंटेंट कोन्सुमिंग अनुभव प्रदान करता है जिसकी वजह से मोबाइल में उसका अनुभव भी बेहतर होता है।

कंटेंट तैयार करते समय सबसे इंपॉर्टेंट बिंदु होता की आप कंटेंट शार्ट एंड स्वीट हो, जो मैसेज अपने विजिटर को डिलीवर करना चाहते है वह पूरी तरह कम शब्दों में डिलीवर होना।

यूजर का इंटेंट और उस पैराग्राफ हेडिंग का इंटेंट डिलीवर करना भी जरूरी है।

जब भी पोस्ट लिखे अपने पोस्ट का Overall Readability Score जरूर चेक करे इस से आपको बाउंस रेट कम करने में मदद मिलेगी।

 

11. Similar Post का Internal Linking करे

पोस्ट लिखते समय उसके Relevant Content का इंटरलिंकिंग बहुत जरूरी है। इससे विजिटर्स को एक पेज से दूसरे पेज पर जाने में सहायता मिलती है और यह बाउंस रेट की संभावना को लगभग 50% तक कम कर देता है।

जब भी कोई विजिटर कोई कंटेंट पढता है तो उस वेब पेज में किसी भी कीवर्ड से इंटरनल पोस्ट जो पहले आपके वेबसाइट पर पब्लिश्ड हो चुकी हो उसे जोड़ने से रीडर उस कंटेंट में भी इंटरेस्ट दिखता है और जब वह क्लिक कर के नया पेज ओपन करता है तो वो लिंक बाउंसर को रेट को कम करता है।

इसे भी पढ़े: Affiliate Marketing Kya Hai: Type, Programs & Website

उदाहरण के तौर पर मैंने एक लिंक ऊपर जोड़े है। अब इस पेज पर क्लिक कर के जैसे ही विजिटर दूसरे पेज पर जाएगा इस पेज का बाउंस रेट उस विजिटर के केस में 0% हो जायेगा।

 

12. सही Visitor तक पहुंचने से Bounce Rate कम होता है

अपने वेबसाइट के बाउंसर बेहतर करने के लिए एक ब्लॉगर काफी मेहनत करता है इसके बावजूद भी अगर उसका बाउंस रेट सही नहीं हो रहा है तो उसकी संभावना यह भी है कि वह अपने सही ऑडियंस तक नहीं पहुंच रहा है।

कई बार गलत ट्रैफिक लाने की वजह से भी बाउंस रेट बढ़ता है। आप जिस केटेगरी पर ब्लॉग लिख रहे हैं या जिस केटेगरी में आप कंटेंट राइटिंग कर रहे हैं उसी कैटेगरी के ऑडियंस को टारगेट करें।

राइट ऑडियंस तक पहुंचने के लिए राइट कीवर्ड रिसर्च करना, सही तरीके से ऑप्टिमाइज़ करना और सही कंटेंट डिस्क्रिप्शन लिखना जरुरी होता है।

उदाहरण के तौर पर अगर आपका ब्लॉग है हेल्थ फिटनेस केटेगरी(Health & Fintenss Cateogry Blog) में और आप आप कंटेंट लिख रहे हैं पोस्ट कर रहे हैं टेक Niche में तो यह गलत ऑडियंस को टारगेट करना कहलाता है।

 

13. Various Types Of Content का उपयोग करे

अपने विजिटर को engage करने के लिए अलग अलग टाइप के कंटेंट का उपयोग करे इस से आपका विजिटर आपके वेबसाइट पर देर तक ठहरता है और उसकी वेबसाइट के साथ Engagement भी बढ़ती है।

वेब पेज में टेक्स्ट कंटेंट के साथ वीडियो कंटेंट का उपयोग अधिक प्रभावी होता है।

High Quality Image विजिटर के साथ अच्छे इम्प्रैशन और सटीक प्रभाव डालता है जो उसी वेबसाइट के दूसरे पेज पर भी जाने के लिए मैसेज देता है।

 

14. अनावश्यक Popups से दूर रहे

जब आप अपने विजिटर्स को कोई इंस्ट्रक्शंस को फॉलो करने के लिए या कोई डेटा फील करने के लिए फोर्स करते हैं तो यह भी एक कारण बनता है बाउंस रेट के लिए।

अपने वेबसाइट पर शुरुआती की 20 Second तक किसी भी तरह का कोई Popups नहीं दिखाना चाहिए इससे यूजर के मन पर अच्छा प्रभाव नहीं पड़ता है और यूजर तुरंत भाग जाता है।

अपने विजिटर को Scroll Down करके नीचे जाने तक का समय दें ताकि वह कंटेंट को ठीक से पढ़ सके और देख सके इसके बाद ही अगर कोई Popups दिखाना चाहे तो दिखाए।

 

15. Limit Distracting Ads to Reduce Bounce Rate

वेबसाइट पर अनावश्यक ऐड देखने की वजह से भी बाउंस रेट बढ़ता है। जब कोई ऐड सही प्लेस पर नहीं दिखता है या बड़े बड़े ऐड जो पढ़ने में समस्या खड़ी करते है ऐसे ऐड को पहचाने और उसे ब्लॉक करे।

Horizontal Rectangular ad जो पेज कंटेंट के सबसे टॉप पर होते है और कंटेंट के साथ अच्छे परफॉर्म करते है।
कई बार यही लार्ज ऐड विजिटर को पढ़ने में समस्या खड़ी करते है उसे पहचाने।

अपने साइट विजिटर्स को सुनें, उनके कंप्लेन और उनके स्पेसिफिक एड्स के बारे में कंप्लेंट का फॉलोअप ले और यह जानने की कोशिश करें कि आखिर उन्हें किस तरह की प्रॉब्लम आ रही है और उसको शॉटआउट करें।

 

16. कंवेंसिंग Call-To-Action बटन जोड़े

कॉल टू एक्शन बटन क्लीयरली विजिबल होना चाहिए। Call-To-Action बटन इस तरह से दिखना चाहिए की यूजर को बटन लोकेट करने में किस 1 सेकंड से ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए।

बटन कंप्लेनिंग होना चाहिए, उसका Fonts Size, कलर आदि Impressive दिखना चाहिए और ताकि विजिटर उस पर क्लिक कर सके।

अच्छे इंप्रेशन के साथ प्रभाव छोड़ने वाले बटन का पॉजिटिव परसेंटेज भी हाई होता है।

 

17. Broken Links को दूर करे

वेबसाइट को हमेशा खंगालते रहने चाहिए। हो सके तो सप्ताहिक रूप से या हर 15 दिन पर अपने वेबसाइट को खंगाले और देखेंगे कहीं पर कोई ब्रोकन लिंक तो ऐड नहीं है।

ब्रोकन लिंक को पता करें और उसको रिमूव करें। ब्रोकन लिंक की वजह से भी बाउंस रेट बढ़ता है।

ज्यादा संख्या में ब्रोकन लिंक किसी भी वेबसाइट की यूजर एक्सपीरियंस को खराब करता है। विजिटर उस वेबसाइट से फ्रस्ट्रेट होते हैं और Dissatisfied होकर लौट जाते हैं।

Google Search Console में Bounce Rate कैसे देखे ?

गूगल सर्च कंसोल वेबसाइट के ब्रोकन लिंक को आईडेंटिफाई करने का समस्य और बढ़िया तरीका है।
कई और भी Online Broken Link Identifying Tool है जाओ ब्रोकन लिंक का रिपोर्ट तैयार कर देते है।

Bounce Rate Google Search Console me kaise dekhe

गूगल एनालिटिक्स में किसी Individual Pages का Bounce Rate देखने के लिए आपको Behavior सेक्शन में जाना होगा वह आल पेज का विकल्प दिखेगा उस पर क्लिक करते ही आपको मोस्ट पॉपुलर पेज का अन्य डिटेल के साथ बाउंस रेट भी दिखेगा।

किसी स्पेसिफिक टाइम Duration में बाउंस रेट देखने के लिए Start Date और End Date सेलेक्ट करके अप्लाई बटन पर क्लिक करना पड़ेगा।

Google Analytics Bounce Rate

Google Analytics

 

18. Create A 404 Page to Reduce Bounce Rate

एक 404 page का होना किसी भी वेबसाइट के बाउंस रेट को कम करने में सहायता करता है।

जब विजिटर कोई लिंक पर क्लिक करता है और वह लिंक आपके वेबसाइट में नहीं मिलता है तो उसे 404 page पर Automatically Redirect करने से विजिटर को Navigate कर के किसी दूसरे पर जाने में मदद मिलती है और इस से बाउंस रेट में सुधार होता है।

किसी लिंक के नहीं मिलने से उसका Alternative Webpages उस विजिटर के लिए बढ़िया अनुभव में गिना जाता है।

 

19. नया कंटेंट Frequently पब्लिश करते रहे

अपने वेबसाइट पर नियमित रूप से कंटेंट पब्लिश करे यह आपके यूजर के लिए अलग अलग टॉपिक को एक्स्प्लोर करने का विकल्प देता है।

वेबसाइट पर पर्याप्त मात्रा में नियमित कंटेंट पब्लिश होने से विजिटर के दुबारा लौट कर आने की सम्भावना कई गुना बढ़ जाती है जो उसे उस वेबसाइट पर देर तक टीके रहने के लिए Convince करना है।

 

20. साइट की विश्वसनीयता प्रदर्शित करें(Demonstrate Site Credibility)

एक विजिटर जब साइट पर विजिट करता है तो उसकी विश्वसनीयता जरूर देखता है की क्या यह साइट इतनी ऑथेंटिक है जहा किसी सुचना पर विश्वास कर सके।

किसी भी सुचना को अपने वेबसाइट पर पुब्लिस करने से पहले उसकी जांच जरूर करे।

अपने ब्लॉग कंटेंट या प्रोडक्ट की जांच करते रहने के साथ समय समय पर अपडेट करने की भी जरूरत परती है।

अपने वेबसाइट को सुरक्षित दिखने के लिए SSL certificate का भी उपयोग करे।

किसी विशेष मोहर या सिग्नेचर आदि का इस्तेमाल करने से वेबसाइट के प्रति लोगो में विश्वास पनपता है।

 

21. Google Analytics और अन्य ट्रैकिंग टूल उपयोग करे

गूगल के कुछ फ्री टूल जैसे की गूगल एनालिटिक्स, सर्च कंसोल आदि के उपयोग से अपने पेज को ट्रैक करने में मदद मिलती है।
पेज का साप्ताहिक Google Analytics चेक करे जैसे की:

  • Time on site.
  • Bounce rate.
  • Pages per session.
  • Most frequently
  • Least Frequently Visited Pages.

ये सभी ऑप्शन आप फ्री में चेक कर सकते है और उसमे सुधार कर सकते है।

 

निष्कर्ष: Bounce Rate

अगर आप ऊपर बताए गए सही तरीकों को अम्ल कर लेते हैं और अपने वेबसाइट की सभी कमियों को सुधार लेते हैं तो बाउंस रेट काफी बेहतर हो जाएगा।

किसी भी वेबसाइट की बाउंस रेट ज्यादा होना उसकी निम्न गुणवत्ता या कम होना उसकी उच्च गुणवत्ता को दर्शाता है।

बाउंस रेट वेबसाइट की ऑथेंटिसिटी स्कोर को भी प्रभावित करता है। जब आप अपने विजिटर्स के लिए या ऑडियंस के लिए सही क्वालिटी कंटेंट डिलीवर करते हैं तो यह आपके वेबसाइट की एक अच्छा ब्रांड बनाने में मदद करता है।

what is the bounce rate in Hindi

what is bounce rate

bounce rate in digital marketing

Leave a Reply

Your email address will not be published.